Tag «hindi kavita kosh»

वर्षा ऋतू

सावन में जब तू आती है…   सावन में जब तू आती है घनघोर घटाएं छाती हैं कभी पेड़ो को सहलाती है कभी भंवरों के संग आती है बागों में खेलती रहती है छांव में बैठी रहती है ना दुख में कभी तू रोती है बस हंसती हंसती रहती है न जाने कहां से आती …

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तुझको भी मेरे लफ्जों की बात चाहिए।

खामोश खड़ा हु राहों में तेरा साथ चाहिए, तन्हा है मेरा हाथ तेरा हाथ चाहिए। मुझको मेरे मुकद्दर पर इतना यकीन तो है, तुझको भी मेरे लफ्जों की बात चाहिए। में खुद अपनी शायरी को अच्छा क्या कहु, मुझे तेरी तारीफ तेरी दाद चाहिए। एहसास-ये-मोहोब्बत तेरे ही बास्ते है मेरी, लेकिन जूनून-ये-इश्क को तेरी हर …

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ये तो मोहोब्बत का नूर है

रोज एक हंगामा सामने आ जाता है। तब आखो से आसू निकल ही आता है! ये तो मोहोब्बत का नूर है साहिब। कभी कम तो कभी ज्यादा आ जाता है!! जनता हू क्यों मेरी परवा नहीं करते वो  जमाने की हवा कान मे है ऐसे नहीं थे वो  मेरा खुश रहना जमाने को रास नहीं …

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तेरे इन्तजार में मेने हर सुबह को शाम कर दिया !!

कभी सूरज को चाँद कभी चाँद को सूरज कर दिया, सब काम अपना छोड़ कर हर लम्हा आपके नाम कर दिया । अब तो आ जाओ मेरी आखो में चमक लाने वाले, तेरे इन्तजार में मेने हर सुबह को शाम कर दिया।। तरस रहे है नयना, नयनो में तू ही खटक रहा है, अब तो …

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