सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking

यह जो पॉजिटिव और नेगेटिव थॉट होते हैं  वह अपने पॉइंट ऑफ व्यू से होते हैं  हम जैसा देखते हैं वैसा हम सोचने लगते हैं  हम जैसा सुनते हैं हम वैसा ही सोचने लगते हैं  (सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking)

वास्तव में जिसको हम गलत सोच रहे हैं  उसको कोई और सही सोच रहा हो  जिसको हम सही सोच रहे हैं  उसको कोई गलत सोच रहा हो इसी तरह जो थॉट हमें पॉजिटिव लग रहा है वह किसी को नेगेटिव लग रहा हो

जो हमें नेगेटिव लग रहा है वह किसी और को शायद पॉजिटिव लग रहा हो तो कह सकते हैं यह पॉजिटिव-नेगेटिव बात नहीं होती है यह सिर्फ हमारा एक ओपिनियन होता है

जो थॉट्स आ रहे हैं वह सिर्फ न्यूट्रल होते है उसको हम डिसाइड करते हैं कि यह नेगेटिव है और यह पॉजिटिव है और जिनको हम नेगेटिव डिसाइड कर देते हैं उनके बारे में सोच कर हम खुद ही दुखी होते हैं

जैसा ही हमको सब समझ में आ जाता है तो हम रिलैक्स हो जाते हैं और यह पॉजिटिव- नेगेटिव की लड़ाई खत्म हो जाती है और इस लड़ाई से पहले हम यह सोचते हैं कि हम पॉजिटिव थॉट्स को पकड़ के रखे नेगेटिव थॉट्स को पीछे छोड़ दें

लेकिन जब तक हमें कुछ समझ नहीं आता है हम बस फालतू में परेशान होते रहते हैं और यह लड़ाई खत्म हो जाती है तो हम शांत हो जाते हैं  (सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking)

 

यह सब क्लियर होता कैसे हैं?

हम उस चीज के बारे में उसी तरह सोचते हैं तो हम उसके बारे में सब कुछ जान जाते हैं और यह भी जान जाते हैं कि क्या अच्छा है क्या बुरा है और फिर हम रिलैक्स हो जाते हैं

जैसे मान लो किसी ने आप से लड़ाई कर ली और आप उसके बारे में गलत गलत सोच रहे हो कि उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?  मैंने उसका क्या बिगाड़ा था?  उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था (सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking)

तो भाई यह आपके थॉट्स है यह आप खुद ही क्रिएट कर रहे हो और इनको खुद ही नेगेटिव बोल रहे हो और आप खुद ही परेशान हो रहे हो क्या यह सोचने से आपकी लड़ाई खत्म हो जाएगी?

आप बस यह सोचते हो कि यह नेगेटिव थॉट्स है तो क्या यह सोचने से आपकी लड़ाई खत्म हो जाएगी?

दूसरी तरफ अगर आप उसके बारे में अच्छा सोचोगे और यह सोचोगे कि वह तो अच्छा इंसान है

सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking

पर मैं ही गलत हूं तो फिर खुद पर गुस्सा आएगा खुद पर गुस्सा आएगा तो गुस्सा दूसरे लोगों पर भी उतरेगा जब हम खुद से नाराज होंगे तो सब से नाराज हो जाएंगे खुद से खुश होंगे तो सब से खुश होंगे

अब इसका सलूशन यह है की आप पॉजिटिव को भी छोड़ दीजिए और नेगेटिव को भी छोड़ दीजिए दोनों थॉट्स छोड़ दीजिए ना तो आप पॉजिटिव सोचिए और ना ही नेगेटिव सोचिए उसके बारे में आप क्या सोचते हैं

वह आप छोड़ दीजिए आपको क्या लगता है दूसरों को क्या लगता है सब छोड़ दीजिए बस एक बात पर ध्यान दीजिए कि रियल में बात क्या है(सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking)

जरूरी नहीं है कि जो आपको लगता है यह जो आप सोचते हैं वह सही हो मान लीजिए जिससे आपकी लड़ाई हुई है  वह सही हो आप उसके बारे में गलत सोचते हैं

हो सकता है वह सही हो क्योंकि उस टाइम आप पूरी तरह नहीं बोल सकते कि वह गलत ही है क्योंकि आप सोच ही तो रहे हैं आपको पता थोड़ी ना है कि वह सही में गलत है हो सकता है

वह सही हो और आप उसके बारे में गलत सोच रहे हो आप सिर्फ रियल बात को देखिए आप किसी चीज का फैसला तभी लीजिए जब आप पूरी तरह से संतुष्ट हो जाए पहले से आप ना ही किसी के बारे में अच्छा सोचिए और ना ही बुरा सोचिए

कभी-कभी हम ऐसी बातों को सोच कर परेशान हो जाते हैं जिनके बारे में हमें पता ही नहीं है हम थोड़ा बहुत जानते हैं और हम पता नहीं क्या-क्या सोच लेते हैं हम घटनास्थल पर नहीं होते हैं फिर भी हम पता नहीं क्या-क्या सोच लेते हैं

किसी के बारे में अच्छा सोच लेते हैं किसी के बारे में बुरा सोच लेते हैं

किसी के बारे में अच्छा सोच लेते हैं किसी के बारे में बुरा सोच लेते हैं तो यही आपकी सबसे बड़ी गलती होती है आप किसी के बारे में अच्छा या बुरा तब तक ना सोचे जब तक आप को पूरी बात पता ना हो रियल में क्या हुआ था यह बात जब तक आप ना जान ले तब तक आप किसी के बारे में बुरा या भला ना सोचे

क्या हमें पता था कि वहां क्या हुआ था?  क्यों उसने ऐसा किया?  उसके दिमाग में क्या चल रहा था?  क्या वजह थी यह काम करने की?  जब तक हमें ऐसी कुछ चीजों का पता नहीं चल जाता तो हम उसके बारे में सही या गलत कैसे सोच सकते हैं

क्या पता वह खुद बुरा बनकर आप को महान बनाने की कोशिश कर रहा हो(सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking)

कुछ भी हो सकता है हो सकता है आप सही सोच रहे हो पर हो गलत, और आप गलत सोच रहे हो वह सही हो तो अगर हम एक रिलेशनशिप के बारे में बात करें कि जो हमें लग रहा है जो हम सोच रहे हैं उसे छोड़ दें(सकारात्मक और नकारात्मक सोच क्या होती है/Positive And Negative Thinking)

और रियल बात को देखें तो किसी भी बड़ी से बड़ी प्रॉब्लम का सलूशन निकल सकता है

 

”जो आप सोचते हैं वह गलत हो सकता है क्योंकि आप सिर्फ सोच रहे हैं”

”What you think may be wrong because you are just thinking”

Other websites:-

The Power of Positive Thinking

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