Orchha History In Hindi ओरछा किला, मंदिर, रोचक रहस्य हिंदी में

Orchha Dham का परिचय

मध्यप्रदेश के सबसे नये जिले निवाड़ी में बेतवा नदी के किनारे ओरछा नगर है। पहले ये टीकमगढ़ जिले में था लेकिन अब ये निवाड़ी जिले में आता हैं। मुझे लगता है में Orchha history सबसे अच्छे से बता सकता हु क्यों की में भी निवाड़ी जिले में ही रहता हूं, और कई बार Orchha गया हूं और ओरछा नगर का कोई भी हिस्सा मेरी आँखों से अनदेखा और कोई भी orcha का रहस्य मेरे कानों से अनसुना नहीं है।

ओरछा में भगवान श्री राम राजा सरकार का राज्य आज भी है। और संसार में आज कोई भी मंदिर ऐसा नहीं है। जहाँ भगवान राजा के रूप में पूजे जाते हो परन्तु ओरछा धाम एक ऐसा मंदिर है जहाँ भगवान राम, राजा के रूप में पूजे जाते है। और यही नहीं राम राजा सरकार को रोज सलामी भी दी जाती है।, और बड़े से बड़े नेता, चाहे वो प्रधानमंत्री ही क्यों न हो राजा के रूप में यहाँ नहीं आ सकता है। और ना ही लाल बत्ती में किसी को मंदिर के आसपास घूमने की इज़ाजत है। ये सब ओरछा प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।

Orchha History

यहाँ सुबह सूर्य निकलने से पहले और डूबने के बाद मंदिर में आरती होती है। और राजा राम सरकार को सलामी दी जाती है। इसके अलावा यहाँ बड़े-बड़े किले नगर में चार चाँद लगाते है। और जंगल और पर्वत नगर को अदभुत बनाते है। ओरछा भारत में ही नहीं दुनिया भर में अपनी अलग-अलग विशेषताओं की बजह से प्रशिद्ध है इसलिए यहाँ लगभग दुनिया भर से टुरिस्ट आते है। इसलिए Famous Tourist Places में एक Orchha Tourism place भी है।

Orchha History की प्रचलित कहानियां

ओरछा के पीछे अलग अलग कहानिया है। पहले हम भगवान राजा राम की कहानी जो यहाँ प्रचलित है। और यहाँ के लोगो द्वारा मुझे भी सुनाई गई है।

एक दिन ओरछा के राजा (King Of Orchha) मधुकर शाह ने अपनी पत्नी गणेशकुमारी (Quien Of Orchha) से कृष्ण उपासना के लिए वृंदावन जाने के लिए कहा, अब क्योंकि उनकी पत्नी श्री राम की भक्त थी, तो उन्होंने जाने से इंकार कर दिया। तो राजा ने क्रोध में कह दिया कि, अगर आपको अपने राम लला से इतना ही लगाव है तो, उन्हें अयोध्या से ओरछा ही ले आओ। रानी इस बात को मन में बसा लेती है। और अयोध्या की ओर प्रस्थान करती है। वहाँ पर सरयू नदी के किनारे लक्ष्मण किले के निकट अपनी कुटिया बनाकर श्री राम की उपासना साधना करने लगी।

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तभी उन दिनों संत शिरोमणि तुलसीदास अयोध्या में अपनी साधना कर रहे थे। तो संत तुलसीदास से आशीर्वाद पाकर रानी का विश्वास और ज्यादा दृढ़ हो गया। लेकिन श्री राम के उनको दर्शन नहीं होते है। बाद में बहुत निराश होकर रानी नदी सरयू में अपना शरीर त्यागने का निश्चय कर चुकी थी। और जाकर नदी में कूद गई, और यही जल की गहराइयों में उनको भगवान श्री राम के दर्शन हुए, रानी ने भगवान राम जी को अपनी इच्छा सुनाई। भगवान श्री राम अयोध्या से ओरछा चलने के लिए तैयार हो गए।

पर उन्होंने कुछ शर्ते रखी उनमें से एक मुख्य थी कि पैदल यात्रा करेंगे, मैं ओरछा में राजा बनकर रहूगा। और इस बीच श्री राम की मूर्ति को जिस जगह सबसे पहले रखते हैं। वही पर श्रीराम बस जाएंगे और वहां से वो मूर्ति दोबारा नहीं उठेगी। रानी अपने राज्य ओरछा में पैगाम भिजवाया की वो भगवान ओरछा पधार रहे है। और उनके स्वागत में कोई कमी नहीं होनी चाहिये पुरे राज्य में ये खबर आग की तरह फैल गयी। दूर-दूर से लोग ओरछा में इकत्रित होते है।

Orchha History

एक मुहूर्त निकाल कर राजा ने श्री राम के लिए चतुर्भुज मंदिर बनवाया। ये मंदिर रानी के महल के ठीक सामने बना था। और राम भगवान की स्थापना के लिए पूरी तैयारियां की गयी। लेकिन शुभ मुहूर्त न होने की बजह से, रानी ने मूर्ति को अपनी रशोई में रख दिया। और सोचा शुभ मुहूर्त आने पर मंदिर में स्थापना कर देंगे।

परन्तु जब ये समय आया और मूर्ति को उठाया तो मूर्ति अपने जगह से हटी ही नहीं और फिर रशोई को ही मंदिर बनाया गया। और शायद इसलिए आज भी चतुर्भुज मंदिर आज भी वीरान पड़ा हुआ है। भगवान राम के साथ जानकी माँ, लक्ष्मण जी भी विराजमान है। और मंदिर में हनुमान जी, देवी माता और बहुत सारे देवी देवता भी विराजमान है। और सैकड़ो सालो के बाद आज भी लोग भगवान राम के राज्य में रहते है। और उनको राजा मानते है। और मुझे भी ये सौभाग्य प्राप्त है।

ओरछा पहुचने का रास्ता (Way Of Orchha Fort)

ओरछा नगर पहुचने के लिए आपको सबसे पहले रानी लक्ष्मीबाई के नगर झांसी जो की अभी उत्तर प्रदेश में है। यहाँ आना पड़ेगा फिर ओरछा धाम जाने के लिऐ आपको यहाँ से मात्र 16 किलोमीटर की दूरी तय करना है। नगर में प्रवेश करते ही राम राजा की छत्रछाया और अनन्त कृपा आप पर हो जाती है। और यहाँ के दृश्य देखकर आप आश्चयचकित हो जाएंगे दुनिया के लगभग हर देश से लोग यहाँ आते है। और यहाँ के मंदिर, किले, जंगल, नदी तट किनारे उछलते-कूदते जानवरो को देखते रह जाते है।

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ओरछा के किले (Orchha Fort Orchha History)

ओरछा नगरी एक ऐसा स्थान है। जहाँ केवल हिन्दू धर्म के ही नहीं बल्कि सभी धर्म के लोग जो कला और प्रकति को पसंद करते है। वो भी इस सुन्दर स्थान को अपने मन में उतरने के लिए यहाँ आते है। ये दुनिया भर के टुरिस्ट के लिए एक गढ़ है। और हज़ारो की तादात में यहाँ दूसरे देशो से लोग आते है। और यहाँ के किलो की बनावट, और दूसरी कलाओं को देखते है। यहाँ मुख्य रूप से 2 बड़े-बड़े किले है। पहला राजमहल और दूसरा जहाँगीर महल जिनकी बनाबट देखकर बड़े-बड़े इंजीनियर भी आश्चयचकित हो जाते है। राज महल किले का निर्माण राजा रुद्रप्रताप सिंह ने सन 1501 में करवाया था। फिर जो भी राजा आये वो इस महल की सुंदरता को बरकरार रखे रहे।

सन 1605 से 1627 तक राजा वीर सिंह देव का कब्ज़ा रहा और इसी दौरान उन्होंने जहाँगीर महल बनवाया जो की दोस्ती की मिशाल कहा जाता है। इसके अलावा यहाँ पर एक शीश महल भी है। जिसे Palace of mirror भी कहा जाता है इसे देखकर बड़े बड़े इंजीनियर भी सोच में पड़ जाते है। और फिर इसके अलावा यहाँ पर राय प्रवीण महल, सुन्दर महल भी खास महत्व रखते है। और बेतवा घाट पर भी कई ऐसे महल बने है जिन पर गिद्ध भी निवास करते है। खास बात ये है। कि यहाँ के गिद्ध शाकाहारी है। ऐसा कहा जाता है। मेने इस रहस्य को जानने की कोशिश नहीं की लेकिन गिद्ध एक मासाहारी पक्षी होते हुए यही शाकाहारी भोजन करते है। ये भी कोई साधारण बात नहीं है।

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लक्ष्मीनारायन मंदिर (Orchha Temple, Orchha History)

Laxmi-Narayana मंदिर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी का है। जो ओरछा में एक छोटी सी पहाड़ी पर बना हुआ है। पर ये मंदिर एकांत में है और जंगल के निकट है। तो बन्दर, लंगूरों और दूसरे जानवरो का यहाँ आना जाना लगा रहता है। तो यहाँ अगर कुछ ले जाये तो बंदरी की पहुच से दूर रखें।

खासियत

इस मंदिर में झाँसी की लड़ाई के चित्र बने हुये है। जो वर्षो पुराने है। और यहाँ की मूर्ति लोग खंडित मानते है। लेकिन जिसके दिल में भगवान बास्ते है। और जो कला के प्रेमी है। उनके लिए ये बाते कोई मायने नहीं रखती है।अंत में आपसे में आपसे पूछता हु की Orchha History जो आपको इस पोस्ट से मिली वो कैसी लगी। कॉमेंट में जरूर बताये और कभी ओरछा आये तो मुझे जरूर बताये। जय श्री राम