सोये हुनर को पुकार !! हिंदी कविता !!

जाग अब तू जाग रे,

जागने का वक़्त आ गया ।

देखे जो तूने ख्वाब थे,

पूरे होने का वक़्त आ गया ।।

तेरी हुनर तेरी कला,

दब के कहा ये रह गयी ।

ढून्ढो मुझे खोजो मुझे,

तुमसे ये वो कह रही ।।

सूनी है तेरी जिंदगी,

अपनी तू पहचान बना ले।

तेरी हुनर ही तेरी पहचान है,

जिंदगी का इसको अंजाम बना ले।

जो धूल उस पर चढ़ गयी,

उसको अब तू हटा दे।

तू भी कर सकता है कुछ,

दुनिया को ये दिखा दे।।

                                                                                                                                                Rahul K (2013)

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