ये तो मोहोब्बत का नूर है

रोज एक हंगामा सामने आ जाता है।

तब आखो से आसू निकल ही आता है!

ये तो मोहोब्बत का नूर है साहिब।

कभी कम तो कभी ज्यादा आ जाता है!!

जनता हू क्यों मेरी परवा नहीं करते वो 

जमाने की हवा कान मे है ऐसे नहीं थे वो 

मेरा खुश रहना जमाने को रास नहीं आता है।

ये तो मोहोब्बत का नूर है साहिब,

कभी कम तो कभी ज्यादा आ जाता है !!

 

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